कुछ किताबें सिर्फ पढ़ी जाती हैं… कुछ दिल में उतर जाती हैं।
यह संग्रह उन्हीं में से एक है।
ग़ज़ल अन्ना के साठवें जन्मदिन पर समर्पित ये ग़ज़लें प्रेम, जुदाई, माँ की याद, रिश्तों की मिठास और ज़िंदगी के कोमल-कठोर दोनों रंग समेटे हैं।
शब्द रवि कांत 'अनमोल' के हैं, लेकिन जब वे ग़ज़ल अन्ना की आवाज़ में ढले, तो सिर्फ कविता नहीं रह गए — श्रोताओं की अपनी धड़कन बन गए।
अगर आप ग़ज़ल की वो खुशबू चाहते हैं जो पारंपरिक भी हो और दिल को छूने वाली भी, तो यह किताब आपके लिए है।
एक शायर का सलाम उस आवाज़ को, जिसने उसके शब्दों को सुर दिए।